रुद्रपुर में अवैध कॉलोनियों पर बड़ा एक्शन तय! विकास प्राधिकरण ने शुरू किया चिन्हीकरण, सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों पर जल्द गिरेगी गाज

रुद्रपुर। उधम सिंह नगर जिला विकास प्राधिकरण (यूएसडीए) ने रुद्रपुर और उससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अब निर्णायक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार प्राधिकरण ने ऐसे क्षेत्रों का चिन्हीकरण शुरू कर दिया है, जहां बिना स्वीकृति कॉलोनियां विकसित किए जाने, सरकारी भूमि, ग्राम सभा की संपत्तियों, तालाबों, नालों और जल निकायों पर अतिक्रमण की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। बताया जा रहा है कि चिन्हीकरण का कार्य अंतिम चरण में पहुंचने के बाद राजस्व विभाग, नगर निगम और प्रशासन के संयुक्त अभियान के तहत बड़े स्तर पर जांच शुरू होगी। यदि जांच में सरकारी भूमि पर कब्जा अथवा नियमों के विपरीत कॉलोनियां विकसित होने की पुष्टि होती है तो संबंधित बिल्डरों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ ध्वस्तीकरण, सीलिंग और भारी जुर्माने जैसी कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।
सूत्रों की मानें तो गंगापुर, फुलसुंगा, प्रीत विहार, जयनगर, भूरारानी, जगतपुरा, बगवाड़ा, रम्पुरा और ट्रांजिट कैंप समेत कई क्षेत्रों में विकसित कॉलोनियां प्रशासन की निगरानी में हैं। इन इलाकों में वर्षों के दौरान कृषि भूमि को आवासीय कॉलोनियों में तब्दील किया गया, लेकिन अब यह जांच का विषय होगा कि कॉलोनियों का विकास स्वीकृत मानकों के अनुरूप हुआ या नहीं। प्राधिकरण भूमि अभिलेखों, स्वीकृत ले-आउट, रजिस्ट्री दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान करेगा। जहां भी सरकारी भूमि या सार्वजनिक संपत्तियों को निजी कॉलोनियों में शामिल करने के प्रमाण मिलेंगे, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी है। प्रशासन का मानना है कि अवैध निर्माण पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में शहर की सुनियोजित विकास व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
जानकारों का कहना है कि कई कॉलोनियों में पूरी भूमि की रजिस्ट्री होने का दावा किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद वहां चौड़ी सड़कें, पार्क, मंदिर और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि मौजूद दिखाई देती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पूरी भूमि निजी स्वामित्व की बताकर बेची जा चुकी है तो सार्वजनिक सुविधाओं के लिए छोड़ी गई भूमि आखिर आई कहां से। यही वजह है कि अब प्राधिकरण प्रत्येक कॉलोनी की पैमाइश, सीमांकन और अभिलेखों का सूक्ष्म परीक्षण कराने की तैयारी में है। अधिकारियों का मानना है कि इस जांच से वर्षों से दबे कई ऐसे मामलों का खुलासा हो सकता है, जिनमें सरकारी भूमि या जल स्रोतों को निजी कॉलोनियों का हिस्सा बना दिया गया हो।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस बार कार्रवाई केवल अवैध कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सरकारी भूमि पर कब्जा कर लाभ कमाने वाले पूरे नेटवर्क की भी पड़ताल की जाएगी। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि कहीं नियमों की अनदेखी कर निर्माण की अनुमति तो नहीं दी गई, या फिर बिना किसी स्वीकृति के प्लॉटों की बिक्री कर आम लोगों को गुमराह तो नहीं किया गया। यदि किसी स्तर पर मिलीभगत या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराना और भविष्य में अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर प्रभावी रोक लगाना बताया जा रहा है। हालांकि,प्राधिकरण की सक्रियता ने अवैध कॉलोनियों के कारोबार से जुड़े लोगों में हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में रुद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों में भूमि संबंधी मामलों पर अब तक की सबसे बड़ी जांच और कार्रवाई देखने को मिल सकती है, जिस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।

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