हारे हुए चेहरों को जिम्मेदारी क्यों? भाजपा की नई टीम पर कार्यकर्ताओं का सवाल

रुद्रपुर। भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा, जिला ऊधम सिंह नगर की नई कार्यकारिणी की घोषणा के बाद संगठन के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या नियुक्तियों में व्यापक संगठनात्मक संतुलन के बजाय “अपनों पर मेहरबानी” का फार्मूला अपनाया गया है? घोषित सूची ने न केवल सवाल खड़े किए हैं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच अंदरखाने असंतोष भी गहरा किया है। जिले के अंतर्गत रुद्रपुर, किच्छा, खटीमा, नानकमत्ता और सितारगंज विधानसभा क्षेत्र आते हैं, लेकिन आरोप है कि नई टीम में एक ही क्षेत्र—रमपुरा—को असमान रूप से अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे अन्य क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया है कि संगठनात्मक योग्यता से अधिक स्थानीय समीकरणों को तरजीह दी गई। कार्यकर्ताओं का आरोप है
कि निकाय चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले और तीसरे स्थान पर रहे कुछ चेहरों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जो चेहरे जनता के बीच अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर सके, वे संगठन की मजबूती का आधार कैसे बनेंगे? इसके अलावा “घर-परिवार आधारित समीकरण” साधे जाने की चर्चाओं ने भी सियासी तापमान बढ़ा दिया है। जमीनी स्तर पर लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी और सीमित अनुभव वाले नामों को प्रमुख पद मिलने से समर्पित कार्यकर्ताओं में हताशा देखी जा रही है। कुछ नामों को लेकर पूर्व में लगे आरोपों की चर्चा भी संगठन की छवि पर असर डाल रही है। हालांकि जिला नेतृत्व का कहना है कि सभी नियुक्तियाँ सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक विस्तार को ध्यान में रखकर की गई हैं। लेकिन सवाल अभी भी कायम है—क्या ऊधम सिंह नगर की भाजपा में निर्णय व्यापक संगठनात्मक समझ से हुए हैं या कुछ खास चेहरों पर मेहरबानी के आधार पर? आने वाले दिनों में यह असंतोष किस दिशा में जाएगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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