रुद्रपुर। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा के प्रथम रुद्रपुर आगमन पर जहां पार्टी “एकजुटता” और “मिशन 2027” के बड़े-बड़े दावे करती नजर आई, वहीं शहर के चौराहों पर लगे होर्डिंग्स ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी। सवाल अब यह उठने लगा है कि क्या इसी तरह की अंदरूनी खींचतान के साथ कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव 2027 जीतने का सपना देख रही है?
कार्यकर्ता सम्मेलन के स्वागत में लगाए गए पोस्टरों में उधमसिंहनगर के कई दिग्गज नेताओं की तस्वीरें गायब दिखीं। पूरे जिले से केवल बाजपुर विधायक और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को जगह दी गई, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इससे यह साफ संकेत गया कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
होर्डिंग्स से गायब नामों में किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, जसपुर विधायक आदेश चौहान, उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, नानकमत्ता विधायक और हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए राजकुमार ठुकराल तथा नारायण पाल जैसे कद्दावर चेहरे शामिल हैं। इन नेताओं की अनदेखी ने समर्थकों के बीच नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है।

एक ओर कांग्रेस मंचों से “एकजुट पार्टी” का संदेश देती नजर आती है, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर गुटबाजी इस कदर हावी है कि स्वागत के पोस्टर तक में संतुलन नहीं बन पाया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर पार्टी अपने ही नेताओं को साथ लेकर नहीं चल पा रही है, तो जनता का भरोसा जीतना और भी मुश्किल हो जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव जीतने के लिए केवल नारे और दावे काफी नहीं होते, बल्कि संगठन में मजबूती और समन्वय जरूरी होता है। उधमसिंहनगर जैसे अहम जिले में इस तरह की खींचतान यह संकेत दे रही है कि पार्टी के भीतर अभी भी नेतृत्व और आपसी तालमेल को लेकर गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं।
हाल ही में दिल्ली स्तर पर कई नेताओं की कांग्रेस में वापसी और शामिल होने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी मजबूत होगी, लेकिन रुद्रपुर के इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बैठाया जा सका है या नहीं।
नाराज कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि यदि वरिष्ठ नेताओं को इस तरह दरकिनार किया जाता रहा, तो इसका असर सीधे संगठन और चुनावी परिणामों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि “एकजुटता” केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर स्तर पर दिखाई भी देनी चाहिए।
फिलहाल, रुद्रपुर के ये होर्डिंग्स कांग्रेस के लिए एक चेतावनी की तरह हैं। अगर पार्टी ने समय रहते गुटबाजी पर नियंत्रण नहीं किया, तो “मिशन 2027” का सपना अधूरा रह सकता है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस अपने ही घर की इस कलह को कैसे सुलझाती है, क्योंकि चुनावी जीत का रास्ता केवल नारों से नहीं, बल्कि मजबूत और एकजुट संगठन से होकर ही गुजरता है।
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