रुद्रपुर। जनपद ऊधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में सीलिंग की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में महज 24 घंटे के भीतर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरे प्रकरण पर सख्त रुख अपनाया है। द वॉयस ऑफ इंडिया न्यूज़ द्वारा खबर प्रकाशित किए जाने के बाद जिला प्रशासन, नगर निगम, विद्युत विभाग व शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को सीज कर दिया और भूखंड को सरकारी कब्जे में ले लिया।
गुरुवार को एडीएम पंकज उपाध्याय, एसडीएम मनीष बिष्ट, नगर आयुक्त शिप्रा जोशी, तहसीलदार दिनेश कुटौला समेत सैकड़ों कर्मचारियों की मौजूदगी में प्रशासनिक अमले ने फाजलपुर मेहरौला क्षेत्र में कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने पहले राजस्व विभाग के माध्यम से भूमि की पैमाइश कराई और उसके बाद पूरे भूखंड को सील करते हुए वहां सरकारी बोर्ड लगा दिया गया, जिससे यह स्पष्ट कर दिया गया कि भूमि अब प्रशासन के नियंत्रण में है।

प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। जिस विशेष समुदाय से जुड़े स्कूल संचालक पर करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण कराने के आरोप थे, उसके खिलाफ अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस निर्माण कार्य को अब तक खुलेआम अंजाम दिया जा रहा था, वह प्रशासन की कार्रवाई के बाद पूरी तरह रुक गया है।
कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने केवल अवैध निर्माण को ही नहीं रोका, बल्कि संबंधित स्कूल संचालक द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान को भी जांच के दायरे में ले लिया है। एडीएम पंकज उपाध्याय ने विद्यालय के समस्त दस्तावेजों की जांच के निर्देश देते हुए भूमि संबंधी अभिलेखों और भवन के नक्शे की भी जांच कराने के आदेश दिए हैं।
प्राथमिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि विद्यालय का नक्शा विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं कराया गया है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि बिना नक्शा पास कराए विद्यालय का संचालन कैसे किया जा रहा था और उसे मान्यता किस आधार पर प्रदान की गई। इस संबंध में शिक्षा विभाग को भी विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, विद्युत विभाग द्वारा पहले ही अवैध निर्माण को बिजली कनेक्शन देने से इनकार किया जा चुका था, जिसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहना विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है। हालांकि, अब संयुक्त कार्रवाई के बाद प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और इसे निष्पक्ष कार्रवाई की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। लोगों का कहना है कि जहां आम जनता के छोटे-छोटे निर्माणों पर त्वरित कार्रवाई होती है, वहीं इस बड़े मामले में भी समान रूप से सख्ती दिखाना प्रशासन की विश्वसनीयता को मजबूत करता है।
फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई को द वॉयस ऑफ इंडिया न्यूज़ की खबर का सीधा असर माना जा रहा है, जिसने महज 24 घंटे के भीतर पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने के लिए प्रशासन को मजबूर किया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित स्कूल संचालक के खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है और क्या इस तरह के मामलों पर स्थायी रोक लग पाएगी।
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