सिलेंडर के लिए भटकती रही जनता लेकिन जनप्रतिनिधि गायब,गैस संकट से कराहता रुद्रपुर

रुद्रपुर। जिला मुख्यालय स्थित इंडियन गैस एजेंसी पर इन दिनों गैस सिलेंडर की भारी किल्लत ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। हजारों उपभोक्ता सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि उनके घरों के चूल्हे ठंडे पड़ चुके हैं। शहर में एलपीजी संकट ने हाहाकार मचा रखा है, लेकिन इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की चुप्पी अब लोगों के बीच बड़ा सवाल बनती जा रही है। सुबह से ही इंडियन गैस एजेंसी के बाहर लंबी कतारों में खड़े लोग अपने नंबर का इंतजार करते नजर आते हैं, लेकिन अधिकांश को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। महिलाओं, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों की परेशानी चरम पर है।
कई परिवारों में खाना बनना बंद हो गया है, जिससे आम जनमानस में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने अब राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। एक ओर जनता गैस संकट से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर “जनता के सेवक” कहे जाने वाले जनप्रतिनिधि इस मुश्किल घड़ी में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय घर-घर पहुंचने वाले नेता अब दूरबीन से ढूंढने पर भी दिखाई नहीं दे रहे, जिससे जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि सत्ता पक्ष के नेता और जिम्मेदार पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि इस मुद्दे से जानबूझकर दूरी बनाए हुए हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जब जनता को सबसे ज्यादा जरूरत है, तब उनके प्रतिनिधि कहां हैं? यह मुद्दा अब सियासी गलियारों में भी चर्चा का विषय बन चुका है। इसी बीच पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने इस मौके पर सक्रियता दिखाते हुए पूरे घटनाक्रम को अपने हाथ में ले लिया है। ठुकराल हजारों गैस उपभोक्ताओं के साथ इंडियन गैस एजेंसी पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक आम जनता को राहत नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
धरने के दौरान ठुकराल ने सीधे तौर पर सत्ता पक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जनता त्राहि-त्राहि कर रही है और जनप्रतिनिधि मौन साधे बैठे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन और गैस एजेंसी पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की। धरने में शामिल लोगों ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उपभोक्ताओं का कहना था
कि एक-एक सिलेंडर के लिए उन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, फिर भी उन्हें गैस नहीं मिल रही। महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए यह संकट किसी दोहरी मार से कम नहीं है, और ऐसे में जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी लोगों के गुस्से को और भड़का रही है। रुद्रपुर में गैस संकट अब केवल आपूर्ति की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी का प्रतीक बनता जा रहा है। जहां एक ओर जनता अपने हक के लिए सड़क पर उतर आई है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष के नेता और जनप्रतिनिधि इस पूरे घटनाक्रम से गायब नजर आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह मुद्दा सियासी तौर पर और गरमा सकता है।

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