नीट पेपर लीक पर भड़के सुशील गाबा, बोले- 23 लाख युवाओं के भविष्य से हुआ खिलवाड़

रुद्रपुर। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित पेपर लीक प्रकरण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष सुशील गाबा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि देशभर के लाखों विद्यार्थियों ने महीनों तक कठिन परिश्रम कर परीक्षा की तैयारी की, लेकिन पेपर लीक की घटना ने उनके सपनों और भविष्य दोनों को गहरे संकट में डाल दिया है। गाबा ने इस पूरे मामले को युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में सुशील गाबा ने कहा कि इस वर्ष आयोजित नीट परीक्षा में लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। विद्यार्थियों ने दिन-रात मेहनत कर मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश पाने का सपना देखा था, लेकिन परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सुशील गाबा ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण के पीछे केवल निचले स्तर की लापरवाही नहीं, बल्कि एजेंसी की शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इतनी बड़ी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है तो यह सामान्य चूक नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार, बिना उच्च स्तर की मिलीभगत के इतनी व्यापक अनियमितता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले ने देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह खड़ा कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रभावशाली लोगों, कोचिंग संस्थानों, बड़े कारोबारियों और उच्च पदों पर बैठे लोगों के बच्चों को लाभ पहुंचाने के लिए परीक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ किया गया है। गाबा ने कहा कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो देश के मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। उन्होंने इसे केवल परीक्षा घोटाला नहीं बल्कि देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया।
प्रेस वार्ता के दौरान गाबा ने केंद्र सरकार से मांग की कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा कर उसे तत्काल भंग किया जाए अथवा उसमें बड़े स्तर पर सुधार किए जाएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का गंभीर अभाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके और किसी भी स्तर पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो। गाबा ने कहा कि देशभर के विद्यार्थी और अभिभावक इस मामले की सच्चाई जानना चाहते हैं तथा दोषियों के खिलाफ उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। सुशील गाबा ने दोषियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली को ही नहीं, बल्कि देश की सामाजिक और शैक्षणिक व्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सामान्य धाराओं में कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। सरकार को कठोर संदेश देने के लिए सख्त कानूनी कदम उठाने चाहिए। प्रेस वार्ता में जगदीश तनेजा, हैप्पी रंधावा, सचिन मुंजाल, मोनू निषाद, जावेद अख्तर और करन कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए कठोर कार्रवाई की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि देश के युवाओं का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों को इस मामले में जल्द और निर्णायक कदम उठाने होंगे।

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