चार चेहरे, एक बैठक और सौ सवाल—गदरपुर बना सत्ता का अखाड़ा, आखिर किसकी कुर्सी खतरे में?

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों घी-खिचड़ी की खुशबू के साथ सत्ता की सियासत भी पकने लगी है। गदरपुर में होने जा रहा एक धार्मिक-सामाजिक भोज अब केवल परंपरा का हिस्सा नहीं रह गया है, बल्कि इसे सत्ता संतुलन, अंदरूनी खींचतान और संभावित गठजोड़ के नए संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इस आयोजन ने भाजपा के भीतर दबे तनाव और भविष्य की रणनीतियों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कल गदरपुर मे वसंत पंचमी के अवसर पर ठाकुर–ब्राह्मण समाज का विशेष घी-खिचड़ी भोज आयोजित किया जा रहा है, जिसकी मेज़बानी विधायक अरविंद पांडे करेंगे। इस अवसर पर गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक एक साथ उनके आवास पर पहुंचेंगे। तीनों नेताओं की मौजूदगी को महज शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि एक सियासी संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अनिल बलूनी, जो सांसद बनने के बाद अधिकतर समय दिल्ली में रहते हैं, और त्रिवेंद्र सिंह रावत, जो इन दिनों हरिद्वार के लालतप्पड़ क्षेत्र में सक्रिय हैं, का एक साथ गदरपुर पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। वहीं मदन कौशिक, जो लंबे समय से राजनीतिक हाशिये पर रहे हैं, इस मुलाकात के जरिए एक बार फिर सक्रिय भूमिका में लौटते दिखाई दे रहे हैं। अरविंद पांडे और मदन कौशिक दोनों ही पिछले चार वर्षों से पार्टी के भीतर ‘वनवास’ जैसी स्थिति में रहे हैं। मदन कौशिक ने इस दौरान अपने खन्ना नगर स्थित चार आवासों में बारी-बारी से रहकर समय बिताया, जबकि अरविंद पांडे भी लंबे समय तक राजनीतिक परिदृश्य से लगभग गायब रहे। जब वे दोबारा चर्चा में आए, तो विवादों के कारण ही सुर्खियों में रहे।
ताज़ा विवाद अरविंद पांडे के आवास पर अतिक्रमण का नोटिस चस्पा होने से जुड़ा है, जिसने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं का उनके घर पहुंचना यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर कुछ बड़े समीकरण बन रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह मुलाकात उनके लिए राहत का रास्ता खोल सकती है, या फिर आने वाले घटनाक्रम की भूमिका बन सकती है। भाजपा के अंदर इस चौकड़ी के मिलन को लेकर अटकलों का दौर तेज है। यह मुलाकात केवल एक घंटे की भी हो सकती है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने कहीं गहरे माने जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गदरपुर की इस घी-खिचड़ी से सियासत को कौन-सा नया स्वाद मिलने वाला है।

Post a Comment

0 Comments

तो क्या कॉलोनाइजर की बेरुखी का ऐसा रहा आलम कि अब खंडहर में तब्दील हो रहा पालम ?