जी हां,रुद्रपुर के काशीपुर रोड पर NH 74 से लगाती हुई ग्राम कोलड़ा (किरतपुर) की लगभग 60 एकड़ भूमि पर बीते 14 वर्षों से विकसित होने वाली पालम अथवा पॉम ग्रीन निर्माणाधीन कॉलोनी के कॉलोनाइजर की बेरुखी के कारण अब खंडहर में तब्दील हो रही है जहां एक तरफ कॉलोनी परिसर में बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण लाखों और करोड रुपए की लागत से यहां प्लॉट खरीदने वाले निवेशक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ यहां अपने सपनों का घर बनाने का सपना देखने वाले निवेशक बुनियादी सुविधाओं के विकास की बाट जोह रहे है। यहां रहने वाले कुछ गिने चुने लोग यह बताते हैं की रात के वक्त कॉलोनी परिसर में स्ट्रीट लाइट न होने के कारण भयंकर अंधेरा रहता है जिस कारण यहां जानवरों और अपराधियों का डर बना रहता है।


कॉलोनी परिसर में उगी बड़ी-बड़ी झाड़ियां और अर्ध निर्मित निर्माणों में अक्सर नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। उधर जानकारों की माने तो जिन लोगों ने इस इस कॉलोनी में अपने लाखों रुपए निवेश किए थे अगर NH 74 से लगाती हुई किसी अन्य कॉलोनी में निवेश किया होता तो आज उनकी प्रॉपर्टी में कम से कम चार गुना तो वृद्धि हो ही गई होती। इस निर्माणाधीन कॉलोनी परिसर के अंदर सड़क की दुर्दशा ऐसी है कि आपको यह नहीं पता चलेगा कि सड़क में गड्ढे हैं या फिर गड्ढे में सड़क।
कॉलोनी में पानी की सप्लाई के लिए एक टंकी का निर्माण तो कई वर्ष पूर्व हो गया था पर आज तक टंकी में ना तो पानी पहुंचा और न हो लोगों के घरों में पानी की पाइप लाइन।बताया यह भी जा रहा है कि इस कॉलोनी को विकसित करने के लिए बिल्डर द्वारा केवल कुछ एकड़ भूमि का नक्शा पास करवा कर सरकार को राजस्व का चूना लगाकर लगभग 60 एकड़ भूमि पर प्लॉटिंग काट कर प्लॉटों को बेच भी दिया गया।
अभी हाल ही में इस कॉलोनी में अवैध रूप से बनी कुछ दुकानों को प्राधिकरण द्वारा सील भी किया गया था। इस पूरे मामले पर जब हम कॉलोनाइजर का वर्जन लेने के लिए NH 74 से लगाते हुए एक भूखंड पर झाड़ियां के बीच बने कॉलोनाइजर के कार्यालय पर पहुंचे तो देखा वहां ताला लटक रहा था और तो और वहां पर लगे होर्डिंग और बैनर पर भी किसी का कोई फोन नंबर लिखा हुआ नहीं था। इस अविकसित कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं के नाम पर ठगे गए कुछ निवेशक अब यहां से प्लॉट बेचकर अन्यत्र जाने को भी मजबूर हैं। अपने लाखों रुपए के खून पसीने की कमाई से इस कॉलोनी में प्लॉट खरीदने वाले लोग काफी परेशान हैं।


उधर सूत्रों की माने तो कॉलोनी काटने वाला रसूखदार ने इस कॉलोनी में बचे हुए कुछ पार्कों को भी शहर के सफेदपोशों की मिली भगत से बेच दिया है और बताया यह भी जा रहा है कि कॉलोनी परिसर में स्थित 11 पार्कों में से ज्यादातर की गुपचुप तरीके से रजिस्ट्री भी करवा दी गई है। बताया यह भी जा रहा है कि कॉलोनी के कुछ बड़े-बड़े भूखंडों की रजिस्ट्री के दौरान सरकार को राजस्व का चूना भी लगाया गया है। कॉलोनी में निवेश करने वाले ग्राहकों को लुभाने के लिए कॉलोनी के मुख्य द्वार तक दो सीसी सड़के जरूर बनाई गई पर अंदर की सड़कों का हाल पूरी तरह से बेहाल ही है। बहरहाल इस पूरे मामले का संज्ञान जिला प्रशासन और जिला विकास प्राधिकरण को जरूर लेना चाहिए क्योंकि यहां अपने सपनों का घर बनाने का सपना संजोए हुए ज्यादातर लोग अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
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